रानी की वाव का निर्माण चालुक्य वंश के शासन काल था

रानी की वाव का निर्माण चालुक्य वंश के शासन काल के दौरान हुआ था। करीब 1304 AD में जैन मुनि मेरुंगा सूरी की लिखी प्रबंध चिंतामणि में इसका एक जिक्र आता है। रानी उदयमती ने इसका निर्माण अपने पति की याद में करवाया था। वो राजा भीम (प्रथम 1022-1064 AD) की रानी थी और कर्ण के सहयोग से इसका निर्माण पूरा हुआ था। गुजरात के पाटन में स्थित ये रानी की वाव शायद इस्लामिक आक्रमणों में टूटने से इलिए बच गई क्योंकि समय बीतते बीतते जब सरस्वती नदी में बाढ़ आई और वो सूखी तो ये इलाके के रेत के नीचे दब गई थी। करीब 64 मीटर लम्बी 20 मीटर चौड़ी और 27 मीटर गहरी इस वाव से अब ए.एस.आई. लगभग पूरी तरह मिट्टी हटा चुकी है। अपने काल के पूरे स्वरुप में ये अब नहीं दिखती, अब केवल पश्चिमी कूआँ दिखता है, लिकिन जितना ये नजर आता है उसकी वजह से भी ये अनूठा ही है। इसकी संरचना कुछ ऐसी है जैसे किसी विष्णु मंदिर को उल्टा कर रख दिया गया हो। दीवारों और खम्भों पर साधुओं, पंडितों से लेकर गंधर्व-अप्सराओं तक की कलाकृतियाँ उकेरी गई हैं। सबसे नीचे की सीढ़ी के नीचे एक गुप्त दरवाजा बना हुआ है। इस दरवाजे के पीछे एक तीस किलोमीटर लम्बी सुरंग है। सुरंग को अब पत्थर और मिट्टी से बंद कर दिया गया है, लेकिन वो पाटन के पास सिद्धपुर नाम की जगह तक जाता है। कभी राजा के बच निकलने के लिए ये गुप्त मार्ग बनवाया गया होगा, देखने में रोचक होता, लेकिन पर्यटन के आकर्षण की ये चीज़ अब सरकार ने चतुराई से बंद कर रखी है। सीढियां सबसे नीचे वाले ताल तक जाती हैं और हर मंजिल पर सजा हुआ गलियारा है। कुल सात मंजिलों में 800 से ऊपर कलाकृतियाँ नजर आती हैं। ये विष्णु को समर्पित है इसलिए कई मूर्तियाँ दशावतार को ही दर्शाती हुई हैं। सोलह श्रींगार से सजी अप्सराएं भी हैं, और हाँ, बुद्ध भी हैं। जहाँ पानी का स्तर होता है वहां पर शेषनाग पर विष्णु की मूर्ती है। इसके पानी को उसकी आयुर्वेदिक योग्यता के लिए भी जाना जाता था। 1980 से पहले जब खुदाई नहीं हुई थी तब भी यहाँ कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के पौधे थे। साठ-सत्तर साल पहले तक ये इलाका इलाज करने वाले पानी के लिए जाना जाता था। कुछ ही समय पहले 2016 में उनिस्को ने इस भारत के 31वें विश्व धरोहर का दर्जा भी दिया है। धीरे धीरे इसकी ख्याति भी फिर से बढ़ती जा रही है। हम इस से पानी बचने के पारंपरिक अभियंत्रण के नुस्खे भी सीख सकते हैं। भारत में इस्लामिक आक्रमण के पहले तक, प्रौद्योगिकी कैसे इस्तेमाल होती थी, वो भी सोच सकते हैं….


correspondent

DesertTimes.in

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