खाकी पहनी और कंधे पर बंदूक यौवन उसका गदराया है

सुषमा मलिक

मत सोचो कि आज किसी एक माँ का बेटा फौजी बना हैं।
आज तो भारत माता का सीना पूरी शान के साथ तना है।।
खाकी पहनी और कंधे पर बंदूक यौवन उसका गदराया है।
उसकी हुंकार के आगे तो देखो दुश्मन ने शीश झुकाया है।।
माँ की याद समेटे है वो दिल मे, पर कब मदर्स डे मनाता है।
बहना उसकी बाट जोहे पर, कब राखी पर घर वो आता है।।
कंधे पर बिस्तर, हाथ मे टैची, छः महीने में वापस आया है।
मेरे देश के वीर सैनिक ने भी शादी का सपना सजाया है।।
सियाचिन में लगी हो ड्यूटी, या लगी हो कश्मीर के बॉर्डर पर।
जल्दी ही वापस जाना होगा इसे, अफसर से मिले आर्डर पर।।
भूल गया उस दुल्हन को वो, वो बन्दूक लगी उसे प्यारी है।
यार दोस्त सब हुए गैर अब, भारत माँ से उसकी यारी है।।
मत सोचो बॉर्डर पर जाग रहा जो, वो किसी बहन का भाई है।
आंखे खोलो भारतवासियो वो बस मेरे देश का सिपाही है।।
सोया देश सुख निंद्रा में, इस देश का लाल जाग रहा है।
फौजी देख झुके हर शीश, “मलिक” का दिल ये मान रहा है।।

सुषमा मलिक,
रोहतक (हरियाणा)


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