34 साल बाद रिकॉर्ड में दर्ज हुआ सही नाम

जिन्दगी को आसान बना रहे न्याय आपके द्वार शिविर,  एक ही छत के नीचे बँट रहा सुकून उदयपुर.        कोशिश तो उसने खूब की थी, बरसों लग गए फिर भी कुछ न हो पाया। निराशा के भँवर में जाने कब से इधर-उधर चक्कर काटता रहा। केवल एक शब्द की त्रुटि की वजह से उसे इतनी परेशानी …

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