“​​तुम मेरे कौन हो”

सुषमा मलिक लाख कोशिश करती हूं, लेकिन समझ नही पाती हूँ। ​कि ​​तुम मेरे कौन हो? जितना सुलझाती हूँ,​ ​उतनी उलझती जाती हूं। ​​कि तुम मेरे कौन हो? तुम…….. मेरे आसपास की बयार हो। ​​बसंत की हसीन बहार हो। ​​जान निसार है मेरी तुम पर, ​​तुम हर पल के पूरक प्यार हो। तुम……….. ​​तुम खुशी …

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वो भी अजब नजारा था…

डॉ सुलक्षणा वो भी अजब नजारा था एक बूढ़ी माँ की छाती फटी की फटी रह गयी, मुँह से तो वो एक शब्द भी नहीं बोली पर उसकी आँखें सब कुछ कह गयी। जब उसने देखी तिरंगे में लिपटी अपने बेटे की लाश तो वो जड़वत हो गयी, आँखों से उसके एक अश्रु नहीं निकला …

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ज़ंजीरें और आज़ादियाँ… कवि रेवन्त दान की रचना पाठकों के नाम

रेवन्त दान बारहठ ख़्यालों को घेरे हुए है कई सवालों की बेचैनियाँ अजगर सी जकड़न वाली दमघोटू नासूर रिश्तों की बेचैनियाँ क़दम कैसे बढ़ाऊं ए ज़िन्दगी! सर से पाँव तक जकड़ी हुई हैं -ज़ंजीरें ज़ंजीरें ज़ंजीरें। वक़्त है तू कन्धे से उतार दे सड़ चुकी रिश्तों की लाशें मुर्दों का क्या ढोना मुर्दों को क्या …

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बसायें ऐसा एक संसार… युवा कवि मुकेश की रचना

मुकेश बोहरा अमन बसायें ऐसा एक संसार, करें सभी से प्यार, बसायें ऐसा एक संसार। कि मानव.. ओहो…, कि मानव आहा…., कि मानव गाता रहे बस प्यार, प्यार, प्यार।। सब जन मंगल-मंगल पायें, और मन मंगल-मंगल गायें, आपस में स्नेह भरे और, बंद हो शोषण का व्यापार। कि मानव.. ओहो…, कि मानव आहा…., कि मानव …

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